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बराबर ज़ुल्म ढाए जा रहा है : जुल्म शायरी Zulm Shayari Hindi

 बराबर ज़ुल्म ढाए जा रहा है : जुल्म शायरी Zulm Shayari Hindi

ग़ज़ल
बराबर ज़ुल्म ढाए जा रहा है।
वो मेरा दिल दुखाए जा रहा है।

न आया है, न आएगा कभी वो।
तू क्यों आँसू बहाए जा रहा है।

यक़ीनन फिर लगी है ज़र्ब उसको।
वो ख़ुद पर मुस्कुराए जा रहा है।

बजाए ख़ुद के चलने के यहाँ वो।
ज़माने को चलाए जा रहा है।

पुरानों की कहाँ है फ़िक्र उसको।
नए पौधे लगाए जा रहा है।

न जाने कब सुनेगा वो हमारी।
अभी अपनी सुनाए जा रहा है।

बुलाने पर भी जो आता नहीं था।
फ़राज़ अब वो बुलाए जा रहा है।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़
मुरादाबाद

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